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क्यों नहीं लगा सकते भारतीय अपने नाम के आगे सर,महाराजा,नवाब आदि की उपाधि ?

जानिए आखिर क्यों नहीं लगा सकते भारतीय अपने नाम के आगे सर, भारतरत्न ,पद्मश्री ,महाराजा और नवाव जैसी उपाधि –

 

why can no indians post their title before their name

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भारतीय लोगो को अगर किसी सरकार द्वारा यदि किसी भी तरह की उपाधि जैसे सर/नाइटहुड ,महाराजा,भारतरत्न ,पद्मभूषण ,पद्म विभूषण ,पद्मश्री और नवाब आदि से नवाजा जाता है तो वह व्यक्ति उस उपाधि ( title ) को अपने  नाम के आगे नहीं लगा सकता है।

 

भारतीय लोगो द्वारा अपने नाम के आगे किस टाइटल (उपाधि) का प्रयोग क्यों नहीं करते इसका कारण जानने से पहले  ये बात जरूर जान लीजिए की अगर कोई विदेशी सरकार किस भारतीय नागरिक को कोई पुरष्कार या कोई उपाधि ( Title ) देती है तो भारतीय नागरिक केवल अपनी स्वम् की इच्छा से ही वह उस उपाधि को ग्रहण नहीं कर  सकता है उसे उस उपाधि/पुरस्कार  को लेने से पहले भारतीय सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य है ।

अगर सरकार उपाधि लेने से इंकार कर देती है तो वह नागरिक चाहते हुए भी उस उपाधि /पुरस्कार को ग्रहण नहीं कर सकता है।  

 

इस लिए नहीं करते भारतीय नागरिक अपने नाम के आगे किस उपाधि का प्रयोग :-

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 18 के तहत यह प्रावधान है की अगर कोई भारतीय नागरिक अपने नाम के आगे सर/नाइटहुड , पद्मश्री ,पद्मभूषण ,पदमविभूषण ,भारतरत्न, महाराजाऔर नवाब जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकता क्योकि अगर कोई व्यक्ति इन उपाधिओं ( Titles ) का उपयोग करता है तो यह राज्य की समानता के विरुद्ध होगा

अगर भारत सरकार , ब्रिटेन द्वारा द्वारा दी जाने वाली नाइटहुड/सर की उपाधि को लेने की अनुमति दे भी देती है तो भारतीय नागरिक अपने नाम के आगे ” सर ” शब्द का प्रयोग नहीं कर सकता है।

उदाहरण :- (1 ) अभी तक केवल दो ही भारतीय लोगो को नाइटहुड/सर /आर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर की उपाधि मिली है

(1) रविंद्रनाथ टैगोर (1915) ,इनको आजादी अथवा भारतीय संविधान के बनने से पहले यह उपाधि मिली थी अतः रविंद्रनाथ टैगोर अपने नाम के आगे ” सर ” शब्द का उपयोग बिना किसी रोक-टोक के कर सकते थे ,

लेकिन इन्होने 1919 में हुए “जलियावाल बाग हत्याकांड” के विरोध में सर /नाइटहुड की की उपाधि को लोटा दिया था।

दूसरे भारतीय  “रतन टाटा” को  2014 में  यानि संवैधानिक नियम लागू होने के बाद  में  “आर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर” की उपाधि से अवैतनिक तौर पर नवाजा गया था अतः ये अपने नाम के आगे इसके टाइटल का उपयोग नहीं कर सकते  है।

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2 ) मंसूर अली खान पटौदी भारत की आजादी से पूर्व अपने नाम के आगे ” नवाब ” शब्द का प्रयोग करते थे लेकिन भारतीय स्वतंत्रता के बाद उनके नाम से “नवाब” हटवा दिया गया।

 

जाने की क्या है नाइटहुड/सर /आर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर की उपाधि :- Click Here 

 

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